साइबर हमले से यूरोप के बड़े हवाई अड्डों पर हड़कंप, उड़ानों में देरी और रद्दीकरण

यूरोप के कई प्रमुख हवाई अड्डों पर शनिवार को बड़ी अव्यवस्था देखने को मिली जब चेक-इन और बोर्डिंग सिस्टम उपलब्ध कराने वाली एक कंपनी पर साइबर हमला हुआ। लंदन का हीथ्रो एयरपोर्ट, जो महाद्वीप का सबसे व्यस्त हवाई अड्डा है, इस हमले से सबसे ज़्यादा प्रभावित हुआ। इसके अलावा ब्रसेल्स, बर्लिन और बाद में डबलिन व कॉर्क एयरपोर्ट पर भी सेवाएं बाधित रहीं। नतीजा यह हुआ कि कई उड़ानों में देरी और रद्दीकरण दर्ज किए गए, जिससे यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई।

हमले का केंद्र – MUSE सॉफ्टवेयर

यह समस्या Collins Aerospace की MUSE सॉफ्टवेयर प्रणाली में आई गड़बड़ी के कारण उत्पन्न हुई। Collins Aerospace, अमेरिका की RTX कंपनी की सहायक इकाई है, जो दुनिया भर की कई एयरलाइनों को चेक-इन और बैगेज ड्रॉप सेवाएं उपलब्ध कराती है। कंपनी ने इसे “साइबर-संबंधित व्यवधान” बताया लेकिन हमले के पीछे किसका हाथ है, इसकी पुष्टि नहीं की।

हवाई अड्डों पर प्रभाव

हीथ्रो, बर्लिन और ब्रसेल्स में सुबह 11:30 बजे तक 29 उड़ानें रद्द हो चुकी थीं।

ब्रसेल्स एयरपोर्ट ने रविवार को आधी उड़ानें रद्द करने का निर्देश दिया ताकि लम्बी कतारों और अचानक कैंसिलेशन से बचा जा सके।

यात्रियों को एयरपोर्ट आने से पहले एयरलाइन से संपर्क करने की सलाह दी गई।

फ्रैंकफर्ट एयरपोर्ट इस हमले से अप्रभावित रहा।

यात्रियों की परेशानी को देखते हुए मैनुअल चेक-इन की व्यवस्था की गई, लेकिन यह समाधान अस्थायी था।

व्यापक संदर्भ – बढ़ते साइबर खतरे

पिछले कुछ वर्षों में साइबर हमलों ने सरकारों और निजी कंपनियों को गहराई से प्रभावित किया है। स्वास्थ्य सेवा, रक्षा, ऑटोमोबाइल और खुदरा जैसे क्षेत्रों में लगातार बड़े-बड़े हमले हुए हैं। हाल ही में लक्ज़री कार निर्माता जैगुआर लैंड रोवर की उत्पादन इकाइयां भी साइबर हमले से ठप हो गई थीं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह हमला हवाई यात्रा के डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र की कमजोरी और परस्पर-निर्भरता को उजागर करता है। यह भी संभावना जताई गई है कि यह रैनसमवेयर हमला हो सकता है, जिसमें हैकर्स सिस्टम को ठप कर आर्थिक फिरौती मांगते हैं।

यात्रियों की प्रतिक्रिया

यात्रियों के लिए स्थिति बेहद निराशाजनक रही।

बर्लिन एयरपोर्ट पर एक यात्री ने बताया कि उन्हें सिर्फ “तकनीकी खराबी” के बारे में बताया गया, लेकिन इंटरनेट से जानकारी मिली कि यह साइबर हमला था।

एक अन्य यात्री ने कहा, “आज की तकनीक में यह अकल्पनीय है कि ऐसी घटनाओं से बचाव के कोई ठोस उपाय नहीं हैं।”

एयरलाइनों की प्रतिक्रिया

ईज़ीजेट ने कहा कि उसकी उड़ानें सामान्य रूप से संचालित हो रही हैं।

डेल्टा एयरलाइंस ने एक वैकल्पिक उपाय अपनाकर व्यवधान को न्यूनतम कर दिया।

यूनाइटेड एयरलाइंस को मामूली देरी का सामना करना पड़ा लेकिन उड़ानें रद्द नहीं करनी पड़ीं।

ब्रिटिश एयरवेज और रायनएयर ने तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की।

प्रशासनिक प्रतिक्रिया

ब्रिटेन और जर्मनी की साइबर सुरक्षा एजेंसियों ने प्रभावित हवाई अड्डों से संपर्क साधा। यूरोपीय आयोग ने कहा कि अब तक किसी “व्यापक या गंभीर हमले” के सबूत नहीं मिले हैं, लेकिन जांच जारी है।

यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि साइबर सुरक्षा केवल आईटी विभाग की जिम्मेदारी नहीं बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा का अभिन्न हिस्सा है। हवाई यात्रा जैसे संवेदनशील और वैश्विक रूप से जुड़े क्षेत्र में कोई भी डिजिटल हमला लाखों यात्रियों को प्रभावित कर सकता है और आर्थिक गतिविधियों पर गहरा असर डाल सकता है।

इसके तीन बड़े निहितार्थ हैं:-

डिजिटल निर्भरता का जोखिम – एयरपोर्ट और एयरलाइनों की पूरी प्रक्रिया अब तकनीक पर आधारित है। किसी एक सॉफ्टवेयर की विफलता पूरे महाद्वीप की उड़ानों को ठप कर सकती है।

साइबर अपराध का बढ़ता दायरा – हमले अब केवल बैंकों या कॉरपोरेट डेटा तक सीमित नहीं रहे। परिवहन और रक्षा जैसी रणनीतिक सेवाएं भी इनके निशाने पर हैं।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता – साइबर अपराधी सीमाओं से परे काम करते हैं। इसलिए देशों को मिलकर सामूहिक सुरक्षा तंत्र विकसित करना होगा।

साइबर हमले अब केवल तकनीकी संकट नहीं रहे, बल्कि वे आर्थिक स्थिरता, यात्री सुरक्षा और राष्ट्रीय प्रतिष्ठा से भी जुड़े हैं। इस घटना से स्पष्ट है कि डिजिटल बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता न दी गई तो भविष्य में और गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।

-ग्लोबल चर्चा नेटवर्क (GCN)

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About the author

Sophia Bennett is an art historian and freelance writer with a passion for exploring the intersections between nature, symbolism, and artistic expression. With a background in Renaissance and modern art, Sophia enjoys uncovering the hidden meanings behind iconic works and sharing her insights with art lovers of all levels. When she’s not visiting museums or researching the latest trends in contemporary art, you can find her hiking in the countryside, always chasing the next rainbow.