Trump के दबाव में आ गया EU, Russia से LNG की खरीद बंद करने की तैयारी, रूस की ऊर्जा आमदनी पर होगी चोट

यूरोपीय संघ (EU) ने शुक्रवार को घोषणा की कि वह रूस से तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) के आयात पर प्रतिबंध एक साल पहले, यानी 1 जनवरी 2027 से, लागू करेगा। यह कदम मास्को पर लगने वाले 19वें प्रतिबंध पैकेज का हिस्सा है और इसके पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दबाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था पर चोट

यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा— “रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था को जीवाश्म ईंधन से मिलने वाली आमदनी बनाए रखती है। अब समय आ गया है कि हम इस नल को बंद कर दें।”

रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से ही यूरोप ने रूस की ऊर्जा पर अपनी निर्भरता कम करने का अभियान शुरू किया है। हालाँकि, प्राकृतिक गैस विशेष रूप से LNG के मामले में रूस अब भी यूरोपीय बाजारों में एक अहम आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।

ट्रंप का दबाव और यूरोपीय राजनीति

पहले EU ने 2028 तक LNG का आयात समाप्त करने की योजना बनाई थी। लेकिन ट्रंप लगातार यूरोप पर दबाव बना रहे थे कि वह रूस की ऊर्जा पर निर्भरता को जल्द समाप्त करे, अन्यथा अमेरिका मास्को पर और कठोर कदम उठाने को मजबूर होगा। यूरोपीय विदेश नीति प्रमुख काया कैलास ने भी स्पष्ट किया कि EU अब रूस से LNG आयात बंद करने की प्रक्रिया को तेज़ी से 2027 तक पूरा करेगा। लेकिन यह निर्णय सरल नहीं होगा। स्लोवाकिया और हंगरी जैसे रूस-समर्थक देशों ने पहले भी EU के प्रतिबंधों को रोकने का प्रयास किया है। ऐसे में यह देखना होगा कि क्या सभी 27 सदस्य देश इस प्रस्ताव पर सहमति बना पाते हैं।

नए पैकेज का दायरा

इस प्रतिबंध पैकेज में केवल LNG ही नहीं बल्कि कई अन्य क्षेत्रों को भी निशाना बनाया गया है:

रूस का शैडो टैंकर फ्लीट

क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल

रूस और मध्य एशियाई बैंकों पर रोक

चीनी रिफाइनरी और विशेष आर्थिक क्षेत्र (जहाँ से रूस हथियारों से जुड़ी वस्तुएँ मंगाता है)

EU ने साफ किया है कि वे उन सभी कंपनियों और देशों को निशाना बनाएंगे जो रूस को युद्ध के लिए संसाधन मुहैया करा रहे हैं।

ऊर्जा सुरक्षा और अमेरिकी निर्भरता

यूरोप की सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि रूस से LNG की आपूर्ति बंद करने के बाद ऊर्जा की कमी को कैसे पूरा किया जाए। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कमी सबसे पहले अमेरिका से LNG आयात करके पूरी की जाएगी। इससे यूरोप की ऊर्जा निर्भरता अमेरिका पर और बढ़ जाएगी, जबकि वर्तमान में अमेरिका व्यापार टैरिफ और आर्थिक दबाव को एक नीति उपकरण की तरह इस्तेमाल कर रहा है।

ब्रसेल्स स्थित थिंक टैंक ब्रूगेल के विशेषज्ञ सिमोन टालियापिएत्रा का कहना है- “ट्रंप का दबाव असरदार साबित हुआ है। अब यूरोप को जल्दी विकल्प तलाशने होंगे और अमेरिकी आपूर्ति सबसे बड़ा विकल्प होगी।”

रूस की प्रतिक्रिया और भविष्य का संकट

क्रेमलिन ने EU की योजना को खारिज करते हुए कहा कि यह रूस को प्रभावित नहीं करेगी और मास्को अपनी स्थिति नहीं बदलेगा। लेकिन हकीकत यह है कि रूस का ऊर्जा निर्यात उसके युद्ध खर्च की रीढ़ है।
यदि यूरोप LNG पर भी रोक लगाने में सफल हो जाता है, तो रूस को अपनी अर्थव्यवस्था के लिए नए बाजार तलाशने होंगे।

EU का यह कदम केवल ऊर्जा नीति नहीं बल्कि एक रणनीतिक भू-राजनीतिक फैसला है। इससे न केवल रूस पर दबाव बढ़ेगा बल्कि अमेरिका और यूरोप के बीच ऊर्जा सहयोग भी गहरा होगा। लेकिन साथ ही यह यूरोप को एक नए निर्भरता जाल में भी फंसा सकता है, जहाँ रूस से निकलकर वह अमेरिका पर और अधिक निर्भर हो जाएगा।

यूरोप के सामने सवाल यह है कि क्या वह ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता दोनों को संतुलित कर पाएगा, या फिर ट्रंप के दबाव में लिए गए इस फैसले का दीर्घकालिक असर उसके हितों पर भारी पड़ेगा।

-ग्लोबल चर्चा नेटवर्क (GCN)

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About the author

Sophia Bennett is an art historian and freelance writer with a passion for exploring the intersections between nature, symbolism, and artistic expression. With a background in Renaissance and modern art, Sophia enjoys uncovering the hidden meanings behind iconic works and sharing her insights with art lovers of all levels. When she’s not visiting museums or researching the latest trends in contemporary art, you can find her hiking in the countryside, always chasing the next rainbow.