रूस-यूक्रेन युद्ध को साढ़े तीन वर्ष से अधिक समय हो चुका है। इस बीच, यूक्रेन लगातार अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने और युद्ध का स्थायी समाधान खोजने के लिए पश्चिमी सहयोगियों के साथ कूटनीतिक प्रयास तेज़ कर रहा है। यूक्रेन के प्रथम उपविदेश मंत्री सर्जी किस्लित्स्या ने हाल ही में कहा कि अमेरिका और यूरोपीय देशों के साथ कानूनी रूप से बाध्यकारी सुरक्षा गारंटी पर प्रगति हुई है।

अमेरिका की भूमिका और ट्रंप की प्रतिबद्धता
किस्लित्स्या ने स्पष्ट किया कि अमेरिका के साथ द्विपक्षीय समझौता यूक्रेन की सुरक्षा रणनीति का सबसे अहम हिस्सा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा यूक्रेन की रक्षा में सक्रिय भागीदारी का संकल्प यूक्रेन के लिए एक “ब्रेकथ्रू मोमेंट” बताया जा रहा है। अमेरिका की ओर से लॉजिस्टिकल सपोर्ट, हवाई सहायता और खुफिया जानकारी साझा करना, यूक्रेन की सैन्य क्षमता को मजबूती देने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
यूरोपीय सहयोगियों की दुविधा
यूक्रेन को लगभग 30 देशों के तथाकथित “coalition of the willing” से सहयोग का आश्वासन मिला है। इनमें से अधिकतर देश किसी न किसी रूप में मदद देने को तैयार हैं, लेकिन योगदान की प्रकृति और पैमाना अभी तय होना बाकी है।
कुछ देश यूक्रेनी सेना के लिए हथियार और वित्तीय मदद का वादा कर रहे हैं।
कुछ देश विदेशों में बने हथियारों की आपूर्ति और खुफिया जानकारी साझा करने पर विचार कर रहे हैं।
वहीं, विदेशी सैनिकों की तैनाती जैसे संवेदनशील मुद्दे पर मतभेद बने हुए हैं।
किस्लित्स्या ने चेतावनी दी कि व्लादिमीर पुतिन की आक्रामकता यूक्रेन की सीमाओं तक सीमित नहीं रहेगी। यदि यूरोप अपनी सुरक्षा को गंभीरता से लेता है, तो उसे कठिन निर्णय लेने होंगे और अपने नागरिकों को यह समझाना होगा कि उनकी भलाई सीधे-सीधे यूक्रेन की रक्षा क्षमता से जुड़ी हुई है।
युद्ध का यथार्थ और रणनीतिक विकल्प
यूक्रेन के लिए यह कूटनीतिक पहल उस समय हो रही है, जब उसके पूर्वी और दक्षिणी मोर्चों पर रूस की सेना लगातार दबाव बना रही है। कई रणनीतिक गढ़ों पर खतरा मंडरा रहा है और यूक्रेन की सेना संख्या और संसाधनों में पिछड़ रही है।
इसके बावजूद, यूक्रेन ने लंबी दूरी के ड्रोन हमलों के ज़रिए रूस की तेल रिफाइनरियों और ऊर्जा अवसंरचना को निशाना बनाया है। ये हमले यूक्रेन के लिए रूस की अर्थव्यवस्था को क्षति पहुँचाने का सबसे प्रभावी साधन बने हैं। किस्लित्स्या का मानना है कि जब तक रूस वार्ता के प्रति कोई गंभीर संकेत नहीं दिखाता, तब तक यह रणनीति जारी रहेगी।
कानूनी गारंटी की आवश्यकता
यूक्रेन ज़ोर देकर कह रहा है कि भविष्य की कोई भी सुरक्षा गारंटी कानूनी रूप से बाध्यकारी हो और राष्ट्रीय संसदों द्वारा अनुमोदित की जाए। इस पर बहस जारी है कि क्या ये गारंटी अलग-अलग द्विपक्षीय संधियों के रूप में होंगी या फिर बहुपक्षीय समझौते के रूप में।
किस्लित्स्या का बयान यूक्रेन की कूटनीति में एक व्यावहारिक बदलाव का संकेत है। अब केवल रूस की आर्थिक तबाही या अचानक युद्धविराम पर भरोसा नहीं किया जा रहा, बल्कि एक दीर्घकालिक सुरक्षा ढांचे की तलाश हो रही है। यह स्पष्ट है कि यदि अमेरिका और यूरोप ठोस प्रतिबद्धता दिखाते हैं, तो यूक्रेन न केवल अपनी रक्षा कर पाएगा बल्कि पूरे महाद्वीप की सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा। आने वाले महीनों में यह तय होगा कि ये सुरक्षा गारंटी केवल कूटनीतिक शब्दजाल बनकर रह जाती हैं या वास्तव में यूक्रेन को एक विश्वसनीय प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करती हैं।
-ग्लोबल चर्चा नेटवर्क (GCN)
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