प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 75वां जन्मदिन केवल भारत में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में एक बड़े आयोजन की तरह मनाया गया। दुबई की प्रतीकात्मक इमारत बुर्ज खलीफा पर भारतीय तिरंगे की रोशनी और मोदी की तस्वीरें जगमगाईं। यह दृश्य केवल एक जन्मदिन की बधाई नहीं था, बल्कि भारत की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय हैसियत और मोदी की वैश्विक नेतृत्व क्षमता का प्रतीक था।

अंतरराष्ट्रीय बधाइयों का सिलसिला
यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री मोदी को शुभकामनाएँ दीं और उनके स्वास्थ्य तथा भारत की समृद्धि की कामना की। रूस, इज़रायल, इटली और न्यूज़ीलैंड जैसे देशों के नेताओं ने भी मोदी को बधाई देकर इस बात की पुष्टि की कि भारत की कूटनीतिक उपस्थिति लगातार मज़बूत हो रही है।
सबसे उल्लेखनीय क्षण रहा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का फोन कॉल। यह बातचीत न केवल व्यक्तिगत शुभकामना थी, बल्कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों और वैश्विक मुद्दों पर सहयोग का संकेत भी थी। ट्रंप ने यूक्रेन-रूस युद्ध को समाप्त करने के मोदी के प्रयासों की सराहना की और भारत-अमेरिका संबंधों को और सुदृढ़ करने का वादा किया।
घरेलू स्तर पर उत्सव और सेवा भाव
भारत में भाजपा ने हमेशा की तरह “सेवा पखवाड़ा” की शुरुआत की। इस दो सप्ताह लंबे अभियान में देशभर में सामाजिक और जनकल्याणकारी कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। मोदी का अपना रुझान भी यही दर्शाता है कि वे व्यक्तिगत उत्सव की जगह जनता की सेवा को प्राथमिकता देते हैं।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से लेकर सिनेमा जगत के शाहरुख़ खान और नागार्जुन जैसे सितारों ने शुभकामनाएँ दीं। सोशल मीडिया पर #MyModStory ट्रेंड करता रहा, जहाँ नागरिकों और नेताओं ने अपने अनुभव और मोदी से जुड़े किस्से साझा किए।
मोदी की वैश्विक छवि का विश्लेषण
मोदी की वैश्विक छवि एक ऐसे नेता की है जो मजबूत राष्ट्रवाद और व्यावहारिक कूटनीति के बीच संतुलन बनाने में सफल रहे हैं। वे पारंपरिक कूटनीति के दायरे से बाहर निकलकर व्यक्तिगत रिश्तों और बड़े आयोजनों का इस्तेमाल भारत की छवि को चमकाने में करते हैं।
मध्य पूर्व में प्रभाव: यूएई जैसे देशों से गहरे रिश्ते बनाकर मोदी ने ऊर्जा और प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा दोनों मोर्चों पर सफलता पाई है।
अमेरिका और पश्चिमी देशों से सहयोग: ट्रंप जैसे नेताओं के साथ व्यक्तिगत समीकरण भारत को रक्षा और तकनीकी क्षेत्रों में लाभ दिलाते हैं।
वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज़: मोदी खुद को उन देशों का प्रतिनिधि भी बताते हैं जो पश्चिम और चीन के दबाव के बीच संतुलन चाहते हैं।
चुनौतियाँ भी कम नहीं
हालाँकि मोदी की वैश्विक लोकप्रियता निर्विवाद है, लेकिन आलोचक कहते हैं कि भारत के भीतर लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्थिति, अल्पसंख्यकों के अधिकार और प्रेस स्वतंत्रता जैसे मुद्दे उनकी छवि पर प्रश्नचिन्ह लगाते हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी, चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसियों के साथ तनावपूर्ण रिश्ते भारत के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
मोदी का 75वां जन्मदिन केवल एक व्यक्तिगत अवसर नहीं था, बल्कि यह भारत की उभरती वैश्विक ताकत और एक करिश्माई नेतृत्व की स्वीकार्यता का प्रतीक बन गया। बुर्ज खलीफा की रोशनी से लेकर ट्रंप का फोन कॉल और विश्व नेताओं की बधाइयाँ यह बताती हैं कि मोदी की छवि अब केवल भारत के प्रधानमंत्री की नहीं, बल्कि एक ऐसे वैश्विक नेता की है जो आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
-ग्लोबल चर्चा नेटवर्क (GCN)
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