अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला से आ रही एक नाव पर घातक सैन्य कार्रवाई का आदेश दिया। यह इस महीने की दूसरी घटना है जब उन्होंने मादक पदार्थों की तस्करी के नाम पर घातक बल प्रयोग कराया। सतह पर देखें तो यह ड्रग्स के खिलाफ निर्णायक कदम लगता है, लेकिन गहराई से विश्लेषण करें तो इसके कई राजनीतिक और कूटनीतिक निहितार्थ सामने आते हैं।

सबसे पहले, यह घटना ट्रंप की उस आक्रामक शैली का हिस्सा है जो उन्हें बाकी नेताओं से अलग करती है। वे हमेशा कठोर, त्वरित और सैन्य कार्रवाई को “समाधान” के रूप में प्रस्तुत करते रहे हैं। अमेरिकी जनता के एक हिस्से के लिए यह सख़्ती “मजबूत नेतृत्व” का प्रतीक है, खासकर तब जब ड्रग्स की समस्या देश में व्यापक है। लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल हथियारों से इस चुनौती को रोका जा सकता है?
दूसरा, वेनेजुएला के साथ अमेरिका के संबंध पहले से ही तनावपूर्ण हैं। इस तरह की कार्रवाई उस देश की संप्रभुता पर सीधा हस्तक्षेप मानी जाएगी। इससे लैटिन अमेरिकी देशों में अमेरिका विरोधी भावना और भड़क सकती है। यह आशंका भी कम नहीं कि ऐसी स्ट्राइक तस्करी नेटवर्क को खत्म करने के बजाय और जटिल बना देंगी, क्योंकि वे अब वैकल्पिक रास्ते और और अधिक हिंसक तौर-तरीके अपनाएंगे।
तीसरा और सबसे अहम पक्ष राजनीति का है। ट्रंप का यह कदम घरेलू चुनावी राजनीति से भी जुड़ा है। वे खुद को “सख्त कानून-व्यवस्था वाला नेता” साबित करना चाहते हैं। ड्रग्स और सीमा सुरक्षा जैसे मुद्दे अमेरिकी मतदाताओं में हमेशा गहरी पैठ रखते हैं। अतः यह कार्रवाई जितनी सुरक्षा नीति है, उतनी ही चुनावी रणनीति भी है।
यह भी समझना होगा कि ड्रग्स की समस्या का वास्तविक समाधान केवल हथियारों से नहीं, बल्कि बहुआयामी रणनीति से निकलेगा— जिसमें लैटिन अमेरिकी देशों के साथ सहयोग, आर्थिक विकल्प, युवाओं के लिए अवसर और व्यापक सामाजिक सुधार शामिल हों। लगातार सैन्य स्ट्राइक न तो समस्या को जड़ से मिटा पाएंगी और न ही दीर्घकालिक शांति ला पाएंगी।
ट्रंप की यह स्ट्राइक तत्कालिक राजनीतिक लाभ और कठोर छवि बनाने का साधन तो हो सकती है, लेकिन यह अंतरराष्ट्रीय कानून, कूटनीति और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर सवाल भी खड़े करती है। अमेरिका को तय करना होगा कि क्या वह ड्रग्स से लड़ाई को केवल सैन्य दृष्टि से देखेगा या इसे व्यापक सामाजिक-आर्थिक समाधान की चुनौती मानेगा।
-ग्लोबल चर्चा नेटवर्क (GCN)
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