Washington DC में जबरदस्त सत्ता संघर्ष, Trump और Muriel Bowser आपस में टकरा रहे

अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डी.सी. एक बार फिर संघीय सत्ता और स्थानीय प्रशासन के बीच टकराव का अखाड़ा बन चुकी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि यदि डी.सी. की मेयर म्यूरियल बाउज़र ने इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एन्फोर्समेंट (ICE) के साथ सहयोग करने से इंकार किया, तो वे राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर राजधानी को सीधे संघीय नियंत्रण में ले लेंगे। यह केवल प्रशासनिक विवाद नहीं है, बल्कि अमेरिकी संघीय व्यवस्था की जड़ों को झकझोरने वाली स्थिति है।

मुद्दा यह है कि ICE को अवैध रूप से रह रहे अथवा देश में प्रवेश कर रहे लोगों की जानकारी दी जाए या नहीं। बाउज़र का रुख स्पष्ट है कि स्थानीय पुलिस संघीय एजेंसी की “सहायक” नहीं बन सकती। दूसरी ओर, ट्रंप का मानना है कि सहयोग बंद होते ही अपराध का ग्राफ तेजी से बढ़ जाएगा। उनका दावा है कि उनकी तैनात की गई नेशनल गार्ड और संघीय पुलिस बलों ने “अपराध मुक्त राजधानी” की तस्वीर पेश कर दी है।

लेकिन सवाल यह है कि क्या लोकतांत्रिक व्यवस्था में सेना और अर्धसैनिक बलों के दम पर “कानून और व्यवस्था” स्थापित करना उचित है? आलोचकों का कहना है कि यह ट्रंप का “फेडरल ओवररीच” है—अर्थात संघीय सत्ता का स्थानीय संस्थाओं पर अनुचित अतिक्रमण।

अगस्त में ट्रंप ने राजधानी की सड़कों पर हज़ारों नेशनल गार्ड सैनिक उतारे थे। विरोध-प्रदर्शन भले शांत हो गए हों, पर लोकतंत्र की आत्मा पर यह भारी चोट कही जाएगी। राजधानी में इस समय 2000 से अधिक संघीय सैनिक गश्त कर रहे हैं। सवाल यह भी है कि कब तक यह सैन्य उपस्थिति बनी रहेगी और किस कानूनी आधार पर इसका अंत होगा?

ट्रंप की राजनीति में “कानून और व्यवस्था” एक चुनावी नारा बन चुका है। वह इसे “कट्टर वामपंथियों” के विरुद्ध अपनी वैचारिक लड़ाई के औजार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। जनता और व्यवसायों को उन्होंने यह संदेश दिया है कि “डरिए मत, मैं हूं। ज़रूरत पड़ी तो आपातकाल लगाकर भी आपको सुरक्षित रखूंगा।” यह भाषा एक लोकतांत्रिक राष्ट्रपति की नहीं बल्कि एक अति-केंद्रित सत्ता के आकांक्षी की झलक देती है।

इस विवाद ने अमेरिकी शासन-व्यवस्था की जटिलता को उजागर कर दिया है। डी.सी. का नेशनल गार्ड सीधे राष्ट्रपति के अधीन है, जबकि 50 राज्यों की नेशनल गार्ड यूनिट्स राज्यपालों को जवाबदेह होती हैं। यह “विशेषाधिकार” ट्रंप जैसे नेताओं के लिए संघीय शक्ति का हथियार बन जाता है।

वास्तविक चुनौती यह है कि क्या अमेरिका “स्थानीय स्वायत्तता और संघीय एकाधिकार” के बीच संतुलन बना पाएगा? लोकतंत्र की मजबूती केवल अपराध घटाने से नहीं, बल्कि संस्थाओं की स्वायत्तता और संवैधानिक परंपराओं की रक्षा से मापी जाती है। यदि हर संकट का समाधान केवल “आपातकाल” और “संघीयकरण” में ढूंढा जाएगा, तो यह अमेरिकी लोकतंत्र को उसकी मूल आत्मा से दूर ले जाएगा।

-ग्लोबल चर्चा नेटवर्क (GCN)

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About the author

Sophia Bennett is an art historian and freelance writer with a passion for exploring the intersections between nature, symbolism, and artistic expression. With a background in Renaissance and modern art, Sophia enjoys uncovering the hidden meanings behind iconic works and sharing her insights with art lovers of all levels. When she’s not visiting museums or researching the latest trends in contemporary art, you can find her hiking in the countryside, always chasing the next rainbow.