London में Tommy Robinson की रैली, प्रवासन और इस्लाम विरोधी नारों से गूंजा शहर

ब्रिटेन की राजधानी लंदन शनिवार को हज़ारों प्रदर्शनकारियों के हुजूम से गूंज उठी। ध्वजों और नारों के बीच यह प्रदर्शन एंटी-इमिग्रेंट और एंटी-इस्लाम कार्यकर्ता टॉमी रॉबिन्सन द्वारा आयोजित किया गया था। रॉबिन्सन, जिनका वास्तविक नाम स्टीफन याक्सली-लेनन है, लंबे समय से ब्रिटेन की राजनीति में विवादास्पद चेहरा रहे हैं।

रैली का माहौल

दोपहर तक, थेम्स नदी के दक्षिण में दसियों हज़ार लोग जमा हो चुके थे। जुलूस वेस्टमिंस्टर—यानी ब्रिटिश संसद के केंद्र—की ओर बढ़ा। प्रदर्शनकारियों के हाथों में यूनियन फ्लैग और इंग्लैंड का सेंट जॉर्ज़ क्रॉस लहरा रहा था। कुछ लोग अमेरिकी और इज़राइली झंडे भी लाए थे और कई ने ट्रंप समर्थक MAGA कैप्स पहन रखी थीं। नारे प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की आलोचना में लगाए जा रहे थे, जबकि बैनरों पर संदेश लिखा था— “Send them home” (उन्हें वापस भेजो)।

रॉबिन्सन ने इस रैली को “Unite the Kingdom” नाम दिया और इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उत्सव बताया। साथ ही, इसमें हाल ही में अमेरिका में मारे गए दक्षिणपंथी कार्यकर्ता चार्ली किर्क के लिए शोक व्यक्त करने का भी आह्वान किया गया।

राजनीतिक पृष्ठभूमि और विवाद

रॉबिन्सन खुद को “सत्ता की गलतियों को उजागर करने वाला पत्रकार” बताते हैं। वे अमेरिकी अरबपति एलन मस्क के समर्थकों में गिने जाते हैं। हालांकि, ब्रिटेन की प्रमुख एंटी-इमिग्रेशन पार्टी रिफॉर्म यूके, जिसने हाल के सर्वेक्षणों में बढ़त बनाई है, उनसे दूरी बनाए हुए है। इसकी बड़ी वजह है रॉबिन्सन का आपराधिक इतिहास और उनके इस्लाम विरोधी बयानों का रिकॉर्ड।

एक महिला समर्थक, सैंड्रा मिशेल ने कहा- “हमें अपना देश वापस चाहिए, हमें अपनी आज़ादी वापस चाहिए। अवैध प्रवास को रोका जाना चाहिए। We believe in Tommy.”

पुलिस की तैयारी और आशंकाएँ

लंदन मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने इस प्रदर्शन के लिए 1,600 से अधिक अधिकारियों को तैनात किया। इनमें से 500 अन्य शहरों से बुलाए गए थे। पुलिस कमांडर क्लेयर हेन्स ने कहा कि, “हम हर प्रदर्शन को समान दृष्टि से देखते हैं। लोगों को अपने कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल करने की छूट है, लेकिन कानून तोड़ने वालों से सख्ती से निपटा जाएगा।” हालांकि पुलिस को अंदेशा है कि रैली में एक बार फिर एंटी-मुस्लिम नारे और आपत्तिजनक व्यवहार सामने आ सकते हैं, जैसा पहले देखा गया है।

प्रवासन पर ब्रिटेन का उबलता गुस्सा

इस साल अब तक 28,000 से अधिक प्रवासी छोटी नावों के ज़रिये इंग्लिश चैनल पार कर ब्रिटेन पहुँचे हैं। आश्रय के लिए दायर किए गए दावों की संख्या भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई है। नतीजतन, प्रवासन ब्रिटेन की राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा बन चुका है, जिसने कमजोर अर्थव्यवस्था और अन्य समस्याओं को पीछे छोड़ दिया है। लंदन और अन्य शहरों की सड़कों पर जगह-जगह लाल-सफेद इंग्लिश झंडे लहराए जा रहे हैं और दीवारों, सड़कों पर रंगे जा रहे हैं। समर्थक इसे “राष्ट्रीय गर्व का प्रदर्शन” बताते हैं, जबकि एंटी-रेसिज़्म समूह इसे विदेशियों के प्रति शत्रुता का संदेश मान रहे हैं।

लंदन की यह रैली दिखाती है कि ब्रिटेन किस तरह प्रवासन और पहचान की राजनीति में बुरी तरह बंट चुका है। एक तरफ़, लोग इसे स्वतंत्रता और राष्ट्रीय गौरव की लड़ाई मानते हैं, तो दूसरी तरफ़, यह नस्लवाद और इस्लामोफ़ोबिया को वैधता देने का प्रयास भी नज़र आती है। प्रश्न यही है कि क्या ब्रिटिश लोकतंत्र इन टकरावों को संवाद और नीति-निर्माण के ज़रिये सुलझा पाएगा, या फिर यह विभाजन और गहराएगा?

-ग्लोबल चर्चा नेटवर्क (GCN)

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About the author

Sophia Bennett is an art historian and freelance writer with a passion for exploring the intersections between nature, symbolism, and artistic expression. With a background in Renaissance and modern art, Sophia enjoys uncovering the hidden meanings behind iconic works and sharing her insights with art lovers of all levels. When she’s not visiting museums or researching the latest trends in contemporary art, you can find her hiking in the countryside, always chasing the next rainbow.