ट्रंप ने रखी नई शर्तः रूस-चीन पर सख्त प्रतिबंध तभी, जब नाटो रूसी तेल खरीद बंद करे, भारत को बख्शा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को रूस और चीन पर कठोर आर्थिक प्रतिबंध लगाने की बात कही, लेकिन इसके लिए शर्त रखी कि नाटो के सभी सदस्य देश पहले रूस से तेल खरीद पूरी तरह बंद करें। दिलचस्प बात यह रही कि इस बयान में ट्रंप ने भारत का नाम शामिल नहीं किया, जबकि हाल ही में वे भारत पर रूस से तेल खरीद को लेकर दबाव बना रहे थे। इससे कयास लग रहे हैं कि वॉशिंगटन और नई दिल्ली किसी अलग व्यापारिक समझौते की ओर बढ़ रहे हैं।

नाटो पर हमला, भारत को राहत

ट्रंप ने “ट्रुथ सोशल” पर लिखा: “मैं तैयार हूँ, जब नाटो तैयार हो। बस बता दीजिए—कब? नाटो की रूस-युद्ध खत्म करने की प्रतिबद्धता 100% नहीं रही। रूस से तेल खरीदना चौंकाने वाला है।” उन्होंने कहा कि अगर नाटो देश रूस से तेल खरीदना बंद करें और चीन पर 50-100% टैरिफ लगाएँ, तो यह रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने में मदद करेगा। ट्रंप का यह रुख पिछले सप्ताह से भिन्न है, जब उन्होंने भारत और चीन दोनों पर 100% तक टैरिफ लगाने की बात कही थी। लेकिन इस बार भारत को छोड़ देना इस बात का संकेत है कि अमेरिका भारत को लेकर अपेक्षाकृत नरम रुख अपना सकता है।

अमेरिका और यूरोप की “दोहरेपन” पर भारत की आपत्ति

नई दिल्ली पहले ही अमेरिका और यूरोप पर दोहरे रवैये का आरोप लगा चुकी है। भारत का कहना है कि जब यूरोप, जापान, तुर्की और दक्षिण कोरिया रूस से तेल, गैस और कोयला खरीदना जारी रखे हैं, तब सिर्फ भारत पर दबाव डालना अनुचित है। यूरोप और उसके सहयोगी रूस की ऊर्जा बिक्री का लगभग 30% हिस्सा खरीदते हैं। अमेरिका भी रूस से 3-4% आयात करता है, जिसमें खाद, यूरेनियम और धातुएँ शामिल हैं। इस पृष्ठभूमि में भारत ने साफ संकेत दिया है कि वह अपनी ऊर्जा सुरक्षा को दांव पर नहीं लगाएगा।

जी7 और अमेरिकी दबाव

जी7 देशों की वित्त मंत्रियों की बैठक में भी अमेरिका ने अपने सहयोगियों से रूस के राजस्व स्रोतों को खत्म करने के लिए कड़े टैरिफ और प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट और व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर ने कहा: “सिर्फ तभी रूस की युद्ध मशीन की कमर तोड़ी जा सकती है, जब उसकी आमदनी का स्रोत पूरी तरह काट दिया जाए।” हालांकि, ट्रंप प्रशासन ने चीन पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने से परहेज किया है, क्योंकि वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच नाजुक व्यापारिक युद्धविराम चल रहा है।

भारत-अमेरिका समीकरण

ट्रंप की इस “भारत को छोड़ने वाली रणनीति” को कुछ विशेषज्ञ भारत-अमेरिका रिश्तों की मजबूती का संकेत मान रहे हैं। हाल ही में अदाणी समूह ने अमेरिका, यूरोप और ब्रिटेन द्वारा प्रतिबंधित रूसी जहाज़ों को अपने बंदरगाहों में प्रवेश से रोक दिया है। इसे भी दोनों देशों के बीच बढ़ते तालमेल के रूप में देखा जा रहा है।

दबाव, सौदेबाज़ी और भू-राजनीति

ट्रंप का दोहरा संदेश– वे यूरोप और नाटो को रूस-चीन के खिलाफ एकजुट करना चाहते हैं, लेकिन भारत को साथ बनाए रखने के लिए उसे बाहर रख रहे हैं।

भारत का संतुलन– नई दिल्ली रूस से ऊर्जा खरीद जारी रखते हुए अमेरिका और यूरोप के साथ रणनीतिक तालमेल भी बनाए रखना चाहती है।

भू-राजनीतिक सौदेबाज़ी– भारत पर सीधा दबाव न डालना इस ओर इशारा करता है कि अमेरिका भारत को एशिया में चीन-रूस संतुलन का अहम खिलाड़ी मानता है।

ट्रंप की रणनीति से स्पष्ट है कि रूस-यूक्रेन युद्ध केवल सैन्य नहीं, बल्कि गहरे आर्थिक और कूटनीतिक संघर्ष का रूप ले चुका है। भारत इसमें एक मुख्य निर्णायक शक्ति बनकर उभर रहा है, क्योंकि उसकी ऊर्जा ज़रूरतें और रणनीतिक स्थिति दोनों पश्चिमी देशों के लिए अपरिहार्य हैं।

-ग्लोबल चर्चा नेटवर्क (GCN)


#DonaldTrump #RussiaSanctions #ChinaTariffs #NATO #IndiaRussiaOil #ModiDiplomacy #USIndiaRelations #G7 #UkraineWar #GlobalPolitics #EnergySecurity #ModiForeignPolicy #EuropeIndia #TradeWar #Geopolitics

Leave a comment

About the author

Sophia Bennett is an art historian and freelance writer with a passion for exploring the intersections between nature, symbolism, and artistic expression. With a background in Renaissance and modern art, Sophia enjoys uncovering the hidden meanings behind iconic works and sharing her insights with art lovers of all levels. When she’s not visiting museums or researching the latest trends in contemporary art, you can find her hiking in the countryside, always chasing the next rainbow.