रूस-यूक्रेन युद्ध के नए अध्याय ने यूरोप की सामूहिक सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। हाल ही में रूस के ड्रोन पोलैंड की हवाई सीमा में दाखिल हुए, जिसने न केवल नाटो (NATO) देशों को सतर्क कर दिया, बल्कि यूक्रेन की कमजोर वायु सुरक्षा को भी उजागर कर दिया। कीव अब इस घटना का उपयोग करते हुए पश्चिमी देशों से तुरंत और ठोस मदद की मांग कर रहा है।

यूक्रेन की बढ़ती मुश्किलें
यूक्रेन पहले ही मिसाइल और ड्रोन हमलों से जूझ रहा है। हाल के हफ्तों में केंद्रीय कीव और सरकारी प्रतिष्ठान रूसी हमलों का शिकार हुए हैं। यूक्रेन के पास सीमित वायु रक्षा प्रणालियाँ (Patriot, NASAMS, BUK आदि) हैं, और उनके पास पर्याप्त मिसाइल स्टॉक भी नहीं है। नतीजतन, उन्हें चुनिंदा लक्ष्यों को ही रोकने का अवसर मिलता है।
मोबाइल एयर डिफेंस समूह अक्सर सिर्फ मशीनगनों और पिकअप ट्रकों पर लगे हथियारों से ड्रोन गिराने की कोशिश करते हैं। कुछ हेलीकॉप्टरों के जरिए ड्रोन को हवा में ही निशाना बनाया जाता है। लेकिन रूस अब अत्याधुनिक रणनीतियों का इस्तेमाल कर रहा है—कभी ड्रोन को मिसाइल प्रक्षेपवक्र पर भेजना, कभी ज़िगज़ैग उड़ान भरवाना और कभी नकली ड्रोन भेजकर भ्रम फैलाना।
यूरोप और नाटो की दुविधा
पोलैंड ने रूसी ड्रोन पर प्रतिक्रिया देने के लिए अपने नाटो सहयोगियों के साथ मिलकर लड़ाकू विमानों को उतारा। इस घटना ने यूरोपीय नेताओं को एहसास कराया कि यह युद्ध अब केवल “यूक्रेन की समस्या” नहीं रहा, बल्कि सीधे यूरोप की सुरक्षा को चुनौती है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने “ड्रोन वॉल” बनाने का सुझाव दिया है, जबकि पोलैंड ने अमेरिका से और अधिक Patriot सिस्टम भेजने की मांग की है।
हालांकि, यूक्रेन नाटो का सदस्य नहीं है और इस वजह से उसे सुरक्षा गारंटी का लाभ सीधे तौर पर नहीं मिलता। कुछ यूरोपीय नेता मानते हैं कि पहले अपने देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए, जबकि दूसरे का कहना है कि यूक्रेन की सुरक्षा ही यूरोप की सुरक्षा है।
अमेरिका और पश्चिमी हिचकिचाहट
राष्ट्रपति जो बाइडेन का लंबे समय तक यूक्रेन को F-16 विमान न देने का निर्णय आज की स्थिति में यूक्रेन के लिए महंगा साबित हो रहा है। हालाँकि अब अमेरिका ने आंशिक रूप से इसकी अनुमति दी है, लेकिन प्रशिक्षित पायलटों की कमी और सीमित विमानों के कारण यूक्रेन को अपेक्षित सुरक्षा नहीं मिल पा रही।
रूस की रणनीति: भय और थकान पैदा करना
रूस लगातार अपने ड्रोन उत्पादन को बढ़ा रहा है। हाल ही में एक ही रात में 800 से अधिक ड्रोन भेजे गए। इनका उद्देश्य यूक्रेनी रक्षा प्रणाली को थकाना, हथियारों का स्टॉक खत्म करना और नागरिक ढांचे को निशाना बनाना है। खासकर ऊर्जा संयंत्रों को निशाना बनाकर रूस यह सुनिश्चित करना चाहता है कि यूक्रेन इस सर्दी में ऊर्जा संकट का शिकार हो और यूरोप की ओर शरणार्थियों की नई लहर बढ़े।
यूरोप के लिए सबक
यह स्थिति पश्चिमी देशों के लिए दोहरी चुनौती पेश कर रही है—क्या वे अपने संसाधनों को केवल घरेलू सुरक्षा पर केंद्रित करें या फिर उन्हें साझा करते हुए यूक्रेन को भी मज़बूत बनाएं। कई विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रूस को यूक्रेन में रोका नहीं गया, तो खतरा जल्द ही नाटो सीमाओं तक पहुँच जाएगा। इसलिए वास्तविक समाधान केवल हथियार भेजने में नहीं, बल्कि संयुक्त “एयर डिफेंस शील्ड” बनाने में है, ताकि यूक्रेन ही नहीं, बल्कि पूरा यूरोप सुरक्षित रह सके।
-ग्लोबल चर्चा नेटवर्क (GCN)
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