पोलैंड ने बुधवार को अपनी हवाई सीमा में घुसे संदिग्ध रूसी ड्रोन को मार गिराया। यह कदम नाटो (NATO) के किसी सदस्य देश द्वारा रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान पहली बार सीधी कार्रवाई के रूप में दर्ज हुआ है। इस घटना ने पूरे यूरोप को हिला दिया है और द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे गंभीर तनावपूर्ण हालात की याद दिला दी है।

ड्रोन हमला और पोलैंड की प्रतिक्रिया-
पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने संसद को संबोधित करते हुए कहा, “यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद हमारे खुले संघर्ष के सबसे करीब का पल है।”
पोलैंड के F-16 फाइटर जेट्स, डच F-35, इतालवी AWACS निगरानी विमान और नाटो के ईंधन भरने वाले विमान इस ऑपरेशन में शामिल हुए।
कुल 19 ड्रोन पोलैंड की हवाई सीमा में घुसे, जिनमें से कई को मार गिराया गया। एक ड्रोन ने पूर्वी पोलैंड के एक गाँव में एक घर को भी क्षतिग्रस्त कर दिया।
रूस की सफाई और अंतरराष्ट्रीय नाराज़गी
रूस ने आरोपों को “बेबुनियाद” बताया और कहा कि उसके ड्रोन का लक्ष्य केवल पश्चिमी यूक्रेन था, पोलैंड नहीं।
अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और कनाडा सहित कई नाटो देशों ने इस घटना को खतरनाक उकसावे (provocation) की संज्ञा दी।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इसे लेकर चिंता जताई और पोलिश राष्ट्रपति से वार्ता की घोषणा की।
नाटो और अनुच्छेद 4 का सक्रिय होना
पोलैंड ने नाटो संधि के अनुच्छेद 4 (Article 4) को सक्रिय किया है। इसके तहत सदस्य देश किसी भी सुरक्षा खतरे की स्थिति में परामर्श और सामूहिक प्रतिक्रिया की मांग कर सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, रूस इस कदम के जरिए नाटो की एयर डिफेंस प्रणाली की क्षमताओं और कमजोरियों को परखने की कोशिश कर रहा है।
यूरोपीय राजनीति पर असर
यूरोपीय संघ की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयन ने रूस पर और कड़े प्रतिबंध लगाने का आह्वान किया।
यूरोपीय नेताओं का मानना है कि यह घटना रूस के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई को और मजबूत करने का आधार बन सकती है।
हालांकि, टस्क ने यह भी स्पष्ट किया कि अभी “सीधे युद्ध के कगार पर होने का कोई कारण नहीं है।”
विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण
यह घटना दर्शाती है कि रूस-यूक्रेन युद्ध अब केवल सीमित क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रह गया है, बल्कि इसकी आंच नाटो देशों तक पहुँच रही है।
पोलैंड की सक्रिय प्रतिक्रिया ने नाटो की एकजुटता और त्वरित सैन्य प्रतिक्रिया क्षमता को उजागर किया है।
लेकिन साथ ही, यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या यह ड्रोन हमला जानबूझकर किया गया बड़ा उकसावा (provocation) था या तकनीकी चूक?
आने वाले दिनों में यह मुद्दा यूरोप की सुरक्षा रणनीति, ऊर्जा नीति और रूस पर प्रतिबंधों को और कड़ा कर सकता है।
पोलैंड पर ड्रोन हमले की यह घटना रूस-नाटो संबंधों में नया तनाव लेकर आई है। यह न केवल यूरोपीय सुरक्षा व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि आने वाले समय में वैश्विक भू-राजनीति का रुख भी तय कर सकती है। सवाल यह है कि क्या यह केवल “एक और उकसावा” है या यूरोप को बड़े संघर्ष की ओर धकेलने वाला संकेत।
-ग्लोबल चर्चा नेटवर्क (GCN)
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