ट्रंप की नीतियों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था को डुबोया: मूडीज़

अमेरिकी अर्थव्यवस्था एक बार फिर मंदी की आशंका से घिरती दिख रही है। मूडीज़ (Moody’s) के मुख्य अर्थशास्त्री मार्क जांडी, जिन्होंने 2008 की वैश्विक वित्तीय संकट का शुरुआती पूर्वानुमान लगाया था, उन्होंने अब चेतावनी दी है कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था “मंदी की दहलीज” पर है। उनका कहना है कि देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग एक-तिहाई हिस्सा देने वाले राज्य या तो पहले ही गिरावट में जा चुके हैं या मंदी के उच्च जोखिम का सामना कर रहे हैं।

मूडीज़ के विश्लेषण के अनुसार:

*दक्षिणी राज्यों की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत है, हालांकि उनकी विकास गति भी अब धीमी होने लगी है।

*कैलिफोर्निया और न्यूयॉर्क जैसे बड़े आर्थिक केंद्र “संतुलन बनाए हुए” हैं, और इन्हें स्थिर रखना राष्ट्रीय मंदी से बचाव के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

*वहीं वायोमिंग, मोंटाना, मिनेसोटा, मिसिसिपी, कैनसस और मैसाचुसेट्स जैसे राज्यों में मंदी का खतरा सबसे ज्यादा बताया गया है।

*वॉशिंगटन डी.सी. क्षेत्र सरकारी नौकरियों में कटौती के कारण आर्थिक दबाव झेल रहा है।

आम अमेरिकी पर असर

मार्क जांडी के अनुसार इस संभावित मंदी का सीधा असर आम अमेरिकियों पर दो तरह से पड़ेगा:

*महंगाई में तेज़ बढ़ोतरी – ज़रूरी वस्तुओं की कीमतें इतनी बढ़ेंगी कि इन्हें नज़रअंदाज़ करना नामुमकिन होगा।

*नौकरी अस्थिरता – रोजगार के अवसर घटेंगे और पहले से मौजूद नौकरियां भी खतरे में पड़ सकती हैं।

*फिलहाल अमेरिका की वार्षिक मुद्रास्फीति दर 2.7% है, लेकिन जांडी का अनुमान है कि यह अगले एक साल में बढ़कर लगभग 4% तक पहुंच सकती है।

आर्थिक संकट के संकेत

*उपभोक्ता खर्च: 2008-09 वित्तीय संकट के बाद से अब तक की सबसे कमजोर वृद्धि दर्ज की गई है।

*आवास क्षेत्र: अभी भी संघर्ष कर रहा है और मांग में सुस्ती बनी हुई है।

*अमेरिकी टैरिफ: कंपनियों के मुनाफे पर नकारात्मक असर डाल रहे हैं।

रोजगार बाजार की कमजोरी

*अमेरिकी श्रम सांख्यिकी ब्यूरो (BLS) ने मई और जून 2025 के आंकड़ों में संशोधन करते हुए 2,58,000 नौकरियां घटा दीं।

*2025 में औसत मासिक नौकरी वृद्धि सिर्फ 85,000 रही, जो महामारी-पूर्व औसत (177,000) से कहीं कम है।

*यह 2020 की कोविड-जनित मंदी के बाद से सबसे धीमी भर्ती दर है।

अमेरिका की अर्थव्यवस्था फिलहाल एक संकटपूर्ण मोड़ पर खड़ी है। चुनावी वर्ष में यह स्थिति और भी राजनीतिक तनाव ला सकती है। यदि बड़े राज्यों ने संतुलन बनाए रखा तो मंदी को टाला जा सकता है, लेकिन लगातार बढ़ती महंगाई और रोजगार संकट आम जनता के लिए कठिनाइयाँ बढ़ा देंगे।

-ग्लोबल चर्चा नेटवर्क (GCN)


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About the author

Sophia Bennett is an art historian and freelance writer with a passion for exploring the intersections between nature, symbolism, and artistic expression. With a background in Renaissance and modern art, Sophia enjoys uncovering the hidden meanings behind iconic works and sharing her insights with art lovers of all levels. When she’s not visiting museums or researching the latest trends in contemporary art, you can find her hiking in the countryside, always chasing the next rainbow.