जापान की राजनीति एक बार फिर उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा ने रविवार को यह घोषणा की कि वे सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देंगे। यह निर्णय उस समय आया है जब जुलाई के उच्च सदन (Upper House) चुनाव में एलडीपी-कमेइतो गठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा और पार्टी के भीतर से उन पर इस्तीफे का दबाव लगातार बढ़ रहा था।
इस्तीफे की पृष्ठभूमि
इशिबा, जिन्होंने अक्टूबर 2024 में पदभार संभाला था, अपने कार्यकाल के दौरान लगातार तीन चुनावी हार झेल चुके थे— अक्टूबर 2024 में निचले सदन में हार, जून 2025 में टोक्यो के स्थानीय चुनावों में पराजय और जुलाई 2025 में उच्च सदन में उन्होंने बहुमत गंवा दिया था।
इस चुनावी पराजय के बाद गठबंधन की सीटें 141 से घटकर 122 रह गईं।
निचले सदन में पहले ही बहुमत खो चुकी एलडीपी को अब कानून पारित करने के लिए विपक्ष पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
पार्टी के भीतर यह स्थिति अस्वीकार्य मानी गई और इशिबा के नेतृत्व पर सवाल खड़े हो गए।
आर्थिक संकट और जन असंतोष
इशिबा सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती लगातार बढ़ती महंगाई रही। खासकर चावल की कीमतें एक साल में दोगुनी होने से आम जनता बेहद नाराज थी। वेतन वृद्धि धीमी रही और आर्थिक विकास सुस्त पड़ा, जिससे मतदाताओं का विश्वास डगमगाने लगा।
विपक्षी दलों ने कर कटौती और आव्रजन नियंत्रण जैसे मुद्दों को उठाकर जनता का समर्थन हासिल कर लिया, वहीं एलडीपी की छवि लगातार गिरती गई।
पार्टी में अंदरूनी विरोध
68 वर्षीय इशिबा को पार्टी में “अलग सोच वाला नेता” माना जाता था। वे राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर गहरी समझ रखने वाले और “सख्त जापान” के पैरोकार रहे हैं। उन्होंने एशिया में नाटो जैसी सुरक्षा व्यवस्था का सुझाव भी दिया था।
लेकिन पार्टी के भीतर उनके आलोचक उन्हें “विद्रोही आवाज” मानते थे। नेतृत्व संभालने के बाद उन्होंने पार्टी से माफी मांगी, परंतु चुनावी हारों ने उनके समर्थकों की संख्या और घटा दी।
अगला नेतृत्व कौन?
इशिबा का इस्तीफा एलडीपी में नई प्रतिस्पर्धा का रास्ता खोलता है।
साने ताकाइची : कट्टरपंथी दक्षिणपंथी नेता, जो कड़ा रुख अपनाने के लिए जानी जाती हैं।
शिंजिरो कोइज़ुमी : पूर्व प्रधानमंत्री जुनिचिरो कोइज़ुमी के पुत्र, युवा और आकर्षक चेहरा, जिन्हें “भविष्य का नेता” कहा जाता है।
इनमें से कोई भी एलडीपी का अगला चेहरा बन सकता है और पार्टी को स्थिरता देने का प्रयास कर सकता है।
जापानी राजनीति की अनिश्चित राह दिखाई दे रही है क्योंकि शिगेरु इशिबा का इस्तीफा यह संकेत देता है कि जापान की पारंपरिक राजनीति में भी अब बदलाव की मांग तेज हो रही है। लंबे समय से सत्ता में रही एलडीपी अब आर्थिक असंतोष, जनसंख्या संकट और आंतरिक गुटबाज़ी से जूझ रही है। विपक्ष धीरे-धीरे मजबूत होता दिख रहा है, और यदि एलडीपी नया करिश्माई नेतृत्व नहीं खोज पाई तो सत्ता संतुलन बदल सकता है।
इशिबा का कार्यकाल छोटा रहा, लेकिन इसने यह स्पष्ट कर दिया कि सिर्फ “स्थिर हाथ” (Safe Pair of Hands) होना पर्याप्त नहीं है, जनता अब ठोस समाधान और त्वरित राहत चाहती है। जापान की राजनीति आने वाले महीनों में और अस्थिर हो सकती है जब तक कि नया नेतृत्व जनता और पार्टी दोनों का विश्वास न जीत ले।
-ग्लोबल चर्चा नेटवर्क (GCN)

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