कनाडा सरकार की आधिकारिक रिपोर्ट “Assessment of Money Laundering and Terrorist Financing Risks” ने पहली बार स्वीकार किया है कि बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) और इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन (ISYF) जैसे खालिस्तानी आतंकी संगठन कनाडा में मौजूद समर्थकों से आर्थिक मदद प्राप्त कर रहे हैं। यह रिपोर्ट इन संगठनों को “राजनीतिक रूप से प्रेरित हिंसक उग्रवाद” (Politically Motivated Violent Extremism) की श्रेणी में रखती है, जिसमें हमास और हिज़बुल्लाह जैसे संगठनों को भी शामिल किया गया है।
रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष
फंडिंग में कमी, लेकिन सक्रियता बरकरार
पहले कनाडा में इन संगठनों का व्यापक फंडरेज़िंग नेटवर्क था, लेकिन अब यह कुछ छोटे समूहों तक सीमित रह गया है। फिर भी ये समूह वफादार समर्थकों से गुप्त रूप से धन जुटाते रहते हैं।
फंडिंग के विविध स्रोत
*क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग
*मनी सर्विस बिज़नेस और बैंकिंग सेक्टर का दुरुपयोग
*गैर-लाभकारी संगठनों (NGOs) और चैरिटी संस्थाओं के ज़रिए फंड जुटाना
*नशीले पदार्थों व हथियारों की तस्करी और चोरी जैसी आपराधिक गतिविधियाँ
*ऑनलाइन क्राउडफंडिंग, मर्चेंडाइज़ बिक्री, पेड इवेंट्स और मेंबरशिप फीस
प्रवासी समुदायों से सहयोग
रिपोर्ट बताती है कि खालिस्तानी संगठन प्रवासी सिख समुदायों के बीच नेटवर्क बनाकर दान एकत्र करते हैं और उसे भारत विरोधी गतिविधियों में लगाते हैं।
हिंसक तरीकों की स्वीकारोक्ति
अब तक अक्सर खालिस्तानी गतिविधियों को “लोकतांत्रिक स्वतंत्रता” की आड़ में देखा जाता था, लेकिन कनाडा की इस रिपोर्ट ने पहली बार स्वीकार किया है कि ये संगठन “हिंसक साधनों से पंजाब में स्वतंत्र राज्य की स्थापना” की कोशिश कर रहे हैं।
अन्य उदाहरण और व्यापक जोखिम
रिपोर्ट केवल खालिस्तानी संगठनों तक सीमित नहीं है। इसमें कनाडा में हुए कुछ प्रमुख आतंकी हमलों का भी उल्लेख है—
* 2020: एक 17 वर्षीय युवक, “इंसेल मूवमेंट” से प्रभावित होकर, टोरंटो में तलवार से हमला कर एक महिला की हत्या कर देता है।
* 2021: लंदन, ओंटारियो में एक मुस्लिम परिवार के चार सदस्यों की हत्या एक ट्रक हमले में की गई। अदालत ने 2024 में हमलावर को उम्रकैद की सज़ा दी।
रिपोर्ट यह भी चेतावनी देती है कि कनाडा का वित्तीय तंत्र हिज़बुल्लाह और हमास जैसे संगठनों से जुड़े बैंकों के साथ लेन-देन में जोखिम झेल रहा है।
भारत-कनाडा संबंधों पर असर
भारत लगातार कनाडा पर यह आरोप लगाता रहा है कि वहां खालिस्तानी संगठनों को न केवल पनाह मिलती है बल्कि आर्थिक मदद भी उपलब्ध होती है। कनाडा की यह आधिकारिक रिपोर्ट भारत के तर्क को मज़बूत करती है।
एक ओर कनाडा आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहयोग की बात करता है, वहीं दूसरी ओर उसके भीतर सक्रिय नेटवर्क भारत विरोधी गतिविधियों को बल दे रहे हैं।
इससे दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्तों में तनाव और बढ़ सकता है, खासकर जब भारत सुरक्षा चिंताओं को सर्वोपरि मानता है।
कनाडा की यह रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि खालिस्तानी आतंकी संगठन अभी भी सक्रिय हैं, भले ही उनकी फंडिंग कम हो गई हो। यह भारत के लिए गंभीर सुरक्षा चुनौती है और कनाडा के लिए भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर जवाबदेही का सवाल खड़ा करता है। यदि इस दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो भारत-कनाडा संबंधों में और दरार पड़ना तय है।
-ग्लोबल चर्चा नेटवर्क (GCN)

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